PM मोदी ने जनजाति सुरक्षा मंच से की अहम बैठक, आदिवासी समाज के विकास पर दिया विशेष जोर


नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को राजधानी नई दिल्ली में जनजाति सुरक्षा मंच के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इस दौरान आदिवासी समाज के विकास, जनजातीय समुदायों के सशक्तिकरण, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक भागीदारी से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक को जनजातीय समुदायों के हितों और उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने मुलाकात के बाद अपने संदेश में कहा कि आदिवासी समाज के लिए जनजाति सुरक्षा मंच का समर्पण और सेवा भावना अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय देश की सांस्कृतिक विविधता और विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं तथा उनके विकास के बिना भारत के समग्र विकास की कल्पना अधूरी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार जनजातीय क्षेत्रों के विकास और वहां रहने वाले लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, डिजिटल कनेक्टिविटी और रोजगार के अवसरों को जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

आदिवासी समाज को मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर

बैठक के दौरान इस बात पर विशेष चर्चा हुई कि कैसे जनजातीय समुदायों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए, जबकि उनकी परंपराओं, संस्कृति और जीवनशैली का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सके। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आदिवासी समाज केवल भारत की पहचान का हिस्सा नहीं है, बल्कि देश की प्राचीन परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षक भी है।

उन्होंने कहा कि जनजातीय युवाओं को आधुनिक शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है। इसके साथ ही महिलाओं के सशक्तिकरण और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने पर भी चर्चा की गई।

जनजातीय क्षेत्रों में विकास योजनाओं पर चर्चा

बैठक में प्रतिनिधियों ने देश के विभिन्न जनजातीय क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों और चुनौतियों को प्रधानमंत्री के सामने रखा। इनमें शिक्षा सुविधाओं की कमी, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, रोजगार के अवसर, वनाधिकार, पारंपरिक संस्कृति का संरक्षण और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे विषय प्रमुख रहे।

प्रधानमंत्री ने प्रतिनिधियों के सुझावों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार जनजातीय समाज के कल्याण के लिए हर संभव कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं का उद्देश्य आदिवासी समुदायों को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाना है।

उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में जनजातीय क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी और डिजिटल सेवाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया है ताकि दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी विकास का समान लाभ मिल सके।

सांस्कृतिक संरक्षण पर भी हुआ मंथन

बैठक में जनजातीय संस्कृति, भाषाओं, पारंपरिक कला और लोक परंपराओं के संरक्षण पर भी गंभीर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की विविधता उसकी सबसे बड़ी ताकत है और जनजातीय संस्कृति इस विविधता को और समृद्ध बनाती है।

उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों तक आदिवासी परंपराओं और मूल्यों को पहुंचाना बेहद जरूरी है। इसके लिए सरकार विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, संग्रहालयों और स्थानीय कला को बढ़ावा देने वाली योजनाओं पर लगातार काम कर रही है।

सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बैठक

राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और जनजाति सुरक्षा मंच के प्रतिनिधियों के बीच हुई यह बैठक कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हाल के वर्षों में केंद्र सरकार ने जनजातीय समुदायों के विकास और प्रतिनिधित्व को लेकर कई पहल की हैं। ऐसे में यह मुलाकात सरकार की जनजातीय समाज के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि देश के जनजातीय क्षेत्रों में विकास, शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना आने वाले समय की बड़ी चुनौती होगी। इसी दिशा में सरकार और सामाजिक संगठनों के बीच संवाद को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जनजातीय विकास को लेकर सरकार की पहल

गौरतलब है कि केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों में आदिवासी समुदायों के लिए कई योजनाएं चला रही है। इनमें शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य सेवाओं और आर्थिक सहायता से जुड़ी कई पहल शामिल हैं। सरकार का दावा है कि इन योजनाओं का लाभ दूरदराज के जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के दौरान यह भी दोहराया कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में जनजातीय समाज की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण होगी।

नई दिल्ली में हुई यह बैठक आने वाले समय में जनजातीय समाज से जुड़े मुद्दों पर सरकार और सामाजिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय और संवाद को नई दिशा दे सकती है।


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