AC कोचों की सफेद चादरों से यात्रियों में भय और मानसिक असहजता का मामला रेलवे बोर्ड तक पहुंचा, सुनील खंडेलवाल के पत्र पर संज्ञान


गिरिडीह/नई दिल्ली। भारतीय रेलवे के वातानुकूलित यानी AC कोचों में यात्रियों को दी जाने वाली सफेद चादरों को लेकर उठे मानसिक असहजता और भय के मुद्दे पर रेलवे बोर्ड ने संज्ञान लिया है। सामाजिक एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुनील कुमार खंडेलवाल ने इस संबंध में रेलवे बोर्ड को पत्र भेजकर यात्रियों के मनोवैज्ञानिक अनुभव और यात्रा सुविधा से जुड़े पहलुओं को गंभीरता से उठाया था। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, पत्र के बाद मामले को रेलवे बोर्ड के अधिकारी रत्नेश कुमार झा के पास आवश्यक कार्रवाई के लिए अग्रसारित किया गया है।

खंडेलवाल ने अपने पत्र में कहा कि रात की यात्रा के दौरान मंद रोशनी में अलग-अलग बर्थों पर फैली सफेद चादरें कई यात्रियों, खासकर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए भयावह और असहज माहौल बना सकती हैं। उनका कहना है कि कुछ यात्रियों को यह दृश्य अस्पताल या डरावने वातावरण जैसा महसूस होता है, जिससे यात्रा का आरामदायक अनुभव प्रभावित होता है।

सुनील कुमार खंडेलवाल ने रेलवे से सुझाव दिया है कि AC कोचों में सफेद चादरों की जगह हल्के नीले, क्रीम, हल्के ग्रे या अन्य सौम्य रंगों की चादरों के उपयोग पर विचार किया जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि रेलवे यात्रियों की राय जानने के लिए सर्वे और फीडबैक व्यवस्था शुरू करे, ताकि यात्रा सुविधा को मनोवैज्ञानिक दृष्टि से भी बेहतर बनाया जा सके।

रेलवे बोर्ड की सार्वजनिक शिकायत प्रणाली से जुड़े दस्तावेजों/डायरेक्टरी में रत्नेश कुमार झा का नाम ED(PG) यानी Executive Director/Public Grievances से जुड़ा दर्ज है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह मामला यात्री शिकायत और फीडबैक से जुड़े स्तर पर देखा जा रहा है।

खंडेलवाल ने कहा कि भारतीय रेलवे केवल परिवहन सेवा नहीं, बल्कि करोड़ों यात्रियों की भावनाओं और दैनिक जीवन से जुड़ी व्यवस्था है। इसलिए रेलवे को यात्रियों के मानसिक आराम, सुरक्षा-बोध और छोटे-छोटे सुविधा पहलुओं पर भी संवेदनशीलता से ध्यान देना चाहिए।


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