भारत-कोरिया CEPA वार्ता का 12वां दौर नई दिल्ली में संपन्न, डिजिटल व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला सहयोग पर बड़ा फोकस


नई दिल्ली में भारत और कोरिया गणराज्य (दक्षिण कोरिया) के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) के उन्नयन को लेकर वार्ता का 12वां दौर आयोजित किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की।

भारत और दक्षिण कोरिया ने एक संतुलित, पारदर्शी और भविष्य-उन्मुख व्यापार साझेदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में आधुनिक व्यापारिक सहयोग को नई तकनीकों और रणनीतिक क्षेत्रों तक विस्तारित करना आवश्यक है।

डिजिटल व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला सहयोग पर विशेष जोर

वार्ता के दौरान डिजिटल व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन (Supply Chain Resilience) और रणनीतिक औद्योगिक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों ने इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए अलग-अलग उप-समूह (Sub-Groups) गठित करने पर सहमति व्यक्त की।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, ग्रीन टेक्नोलॉजी और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच सहयोग को नई गति मिलेगी।

व्यापारिक संबंधों को मिलेगा नया आयाम

भारत और दक्षिण कोरिया के बीच CEPA समझौता वर्ष 2010 से लागू है। अब दोनों देश इसे आधुनिक वैश्विक व्यापार आवश्यकताओं के अनुरूप अपग्रेड करने की दिशा में काम कर रहे हैं। नई वार्ताओं का उद्देश्य व्यापार बाधाओं को कम करना, निवेश को प्रोत्साहन देना और दोनों देशों के उद्योगों के लिए नए अवसर तैयार करना है।

भारत सरकार का मानना है कि CEPA उन्नयन से भारतीय निर्यातकों, MSME क्षेत्र और डिजिटल सेवा कंपनियों को बड़ा लाभ मिलेगा। वहीं दक्षिण कोरिया के लिए भी भारत एक तेजी से उभरता हुआ बड़ा बाजार साबित हो सकता है।

रणनीतिक साझेदारी होगी और मजबूत

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-कोरिया CEPA वार्ता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूत करेगी। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला और तकनीकी सहयोग दोनों देशों की प्राथमिकता बन चुके हैं।

दोनों पक्षों ने आगामी दौर की वार्ताओं में लंबित मुद्दों को तेजी से आगे बढ़ाने और पारस्परिक हितों के अनुरूप समझौते को अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता जताई है।


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